तो क्या तू उसके पास जाएगा?
नज़र नहीं फिरआएगा।
मुझको भूल जाएगा
तो क्या?
तो क्या मैं दर पे गिर पडूँ?
प्यार माँगूँ पर प्यार न करूँ?
आज मैं विवेक हूँ
कल कोई परलोक होगा।
ज़िद्द है तो ज़िद्द है ये
यहीं गिरूंगा , यहीं पडूंगा
देवदास तो दीवाना था
मैं तो अँधा दीन बनूँगा।
है डर मुझे पर तू डर मत
तुझे ख़ुशी के हाथों मैं सौंप के आऊंगा
जिस दिन चाहत न मिले तुझको
मैं मौत को गले लगाऊंगा।
दीवाना कहेंगे, या पागल,
बिशमिल कहेंगे या कायर -
रास्ता कहेंगे
या टायर -
पटरी मैं जब बन पाउँगा
तू जहाँ जाएगा, मैं ले जाऊंगा।
कुछ किसी और का ---
नज़र नहीं फिरआएगा।
मुझको भूल जाएगा
तो क्या?
तो क्या मैं दर पे गिर पडूँ?
प्यार माँगूँ पर प्यार न करूँ?
आज मैं विवेक हूँ
कल कोई परलोक होगा।
ज़िद्द है तो ज़िद्द है ये
यहीं गिरूंगा , यहीं पडूंगा
देवदास तो दीवाना था
मैं तो अँधा दीन बनूँगा।
है डर मुझे पर तू डर मत
तुझे ख़ुशी के हाथों मैं सौंप के आऊंगा
जिस दिन चाहत न मिले तुझको
मैं मौत को गले लगाऊंगा।
दीवाना कहेंगे, या पागल,
बिशमिल कहेंगे या कायर -
रास्ता कहेंगे
या टायर -
पटरी मैं जब बन पाउँगा
तू जहाँ जाएगा, मैं ले जाऊंगा।
कुछ किसी और का ---
क़रीब आते हुए और दूर जाते हुए
ये कौन लोग हैं बे-वज्ह मुस्कुराते हुए ।
ये कौन लोग हैं बे-वज्ह मुस्कुराते हुए ।
ये लम्हे साज़-ए-अज़ल से छलक के गिर गए थे
तभी से यूँ ही मुसलसल हैं गुनगुनाते हुए ।
तभी से यूँ ही मुसलसल हैं गुनगुनाते हुए ।
एक ऐसी सम्त जिधर कब से हू का आलम है
मैं जा रहा हूँ अकेला क़दम बढ़ाते हुए ।
मैं जा रहा हूँ अकेला क़दम बढ़ाते हुए ।
मैं कब से देख रहा हूँ अजीब सी हरकत
मेरा लिखा हुआ कुछ लोग हैं मिटाते हुए ।
मेरा लिखा हुआ कुछ लोग हैं मिटाते हुए ।
जमाल ओवैसी
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