कभी कोई भी बात हो,
कोई छोटी सी जस्बात हो,
या कभी किसी से मुलाक़ात हो,
तो मुझसे कहना।
पल दो पल का साथ हो,
कोई अनकही मुराद हो,
जो भी दिल में बात हो,
वो मुझसे कहना।
अगर,
कभी कोई ऐसी बात हो,
जो मुझसे ना कह पाओ,
उसे अपने दिल में मत दबाओ,
या बिना कहे मत भूल जाओ।
बताओ!
क्यूंकि मैं सुन सकता हूँ
सह सकता हूँ
मान सकता हूँ
अपना सकता हूँ
जो भी सच हो,
क्यूंकि मुझमे और तुम में
कोई फर्क नहीं है।
जो तुम्हारा सच है ,
वो ही मेरा भी है।
सब कुछ बर्दाश्त हो सकता है
पर तुम्हारी चुप्पी नहीं।
कोई छोटी सी जस्बात हो,
या कभी किसी से मुलाक़ात हो,
तो मुझसे कहना।
पल दो पल का साथ हो,
कोई अनकही मुराद हो,
जो भी दिल में बात हो,
वो मुझसे कहना।
अगर,
कभी कोई ऐसी बात हो,
जो मुझसे ना कह पाओ,
उसे अपने दिल में मत दबाओ,
या बिना कहे मत भूल जाओ।
बताओ!
क्यूंकि मैं सुन सकता हूँ
सह सकता हूँ
मान सकता हूँ
अपना सकता हूँ
जो भी सच हो,
क्यूंकि मुझमे और तुम में
कोई फर्क नहीं है।
जो तुम्हारा सच है ,
वो ही मेरा भी है।
सब कुछ बर्दाश्त हो सकता है
पर तुम्हारी चुप्पी नहीं।
Comments
Post a Comment