मैं पढ़ नहीं पा रहा हूँ
कुछ नया गढ़ नहीं पा रहा हूँ
तेरे ख्यालों में सिमटा जा रहा हूं।
कुछ नया गढ़ नहीं पा रहा हूँ
तेरे ख्यालों में सिमटा जा रहा हूं।
तेरे सवालों में उलझा जा रहा हूं।
प्यार में डुुुबा जा रहा हुं?
कैसा प्यार?
जो कभी किसी से भी हो जाए?
सो नहीं पा रहा हूँ
रो नहीं पा रहा हूँ
जब तू नहीं है तो ये हालत है
तू होती तो क्या होता?
कह के रुक जा रहा हूँ
बिना कहे थक जा रहा हूँ
जला जा रहा हूँ
मरा जा रहा हूँ
क्यों?
क्या ये पहले नहीं हुआ?
हुआ है ज़रूर।
पर फिर से होना क्या गलत है ?
क्या करूँ जो हो गया?
क्या करूँ अगर दोबारा भी होगा ,
तुम तो भरोसा नहीं कर सकते ना
इस बात का
की मैं तुम्हारे साथ रहूँगा
पर ये कोई वजह नहीं
मेरे साथ न रहने क लिए। ()
वजहें मैं तुम्हे देता हूँ -
मैं फूंकता हूँ
माल यानि गांजा और सिगरेट
तड़पता हूँ
लड़ता हूँ , झगड़ता हूँ
रूठता हूँ
टूटता हूँ
लड़खड़ाता हूँ
घबराता हूँ
दर जाता हूँ
कभी लड़ नहीं पता हूँ
शरमाता हूँ, शायद।
तुमसे भी
अब कह ही दिया जो कहना है
इसे अपने ही दिल में रहने देना।
प्यार में डुुुबा जा रहा हुं?
कैसा प्यार?
जो कभी किसी से भी हो जाए?
सो नहीं पा रहा हूँ
रो नहीं पा रहा हूँ
जब तू नहीं है तो ये हालत है
तू होती तो क्या होता?
कह के रुक जा रहा हूँ
बिना कहे थक जा रहा हूँ
जला जा रहा हूँ
मरा जा रहा हूँ
क्यों?
क्या ये पहले नहीं हुआ?
हुआ है ज़रूर।
पर फिर से होना क्या गलत है ?
क्या करूँ जो हो गया?
क्या करूँ अगर दोबारा भी होगा ,
तुम तो भरोसा नहीं कर सकते ना
इस बात का
की मैं तुम्हारे साथ रहूँगा
पर ये कोई वजह नहीं
मेरे साथ न रहने क लिए। ()
वजहें मैं तुम्हे देता हूँ -
मैं फूंकता हूँ
माल यानि गांजा और सिगरेट
तड़पता हूँ
लड़ता हूँ , झगड़ता हूँ
रूठता हूँ
टूटता हूँ
लड़खड़ाता हूँ
घबराता हूँ
दर जाता हूँ
कभी लड़ नहीं पता हूँ
शरमाता हूँ, शायद।
तुमसे भी
अब कह ही दिया जो कहना है
इसे अपने ही दिल में रहने देना।
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