सच लिखता हूँ -
शायद वो भी लिखते हों।
फ़र्क़ बस इतना है,
की वो याद रखने के लिए लिखते हैं -
और मैं भूलने के लिए।
ये अफ़साने कोई गीत नहीं, बस आखरी नुमाइश हैं।
शायद वो भी लिखते हों।
फ़र्क़ बस इतना है,
की वो याद रखने के लिए लिखते हैं -
और मैं भूलने के लिए।
ये अफ़साने कोई गीत नहीं, बस आखरी नुमाइश हैं।
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