छूं ही लिया
मन तेरा,
छूं ही लिया
हर सवेरा -
की
कितने
महीनो
से
को
शीश
की
थी
तुझे
पाने
की
की
कितने
नगीनो
से
पूछो
जाकर कैसे मैंने रंजिश की, फरमाइश की थी
तुझे
अपना
ब
ना
ने
की
छुं ही लिया मन तेरा।
मन तेरा,
छूं ही लिया
हर सवेरा -
की
कितने
महीनो
से
को
शीश
की
थी
तुझे
पाने
की
की
कितने
नगीनो
से
पूछो
जाकर कैसे मैंने रंजिश की, फरमाइश की थी
तुझे
अपना
ब
ना
ने
की
छुं ही लिया मन तेरा।
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