बैरी हवाओं में तुम
काली घटाओं में तुम
उलझी लटाओं में तुम
बहती फ़िज़ाओं में तुम
तुम से जुदा नहीं हम
हम से खफा नहीं ग़म
गम को बना सर-ग़म
छेड़ेंगी उसकी ताल -
हम तुम।
थोड़े भीगे भीगे थे तुम,
थोड़े भीगे भीगे थे हम,
कुछ भीगा मौसम
और तुम मेरे पास थे।
आंखें थी नम,
भीनी-भीनी
बातें थी कम
आधी-आधी
सोया जहाँ था
पर तुम मेरे साथ थे।
काली घटाओं में तुम
उलझी लटाओं में तुम
बहती फ़िज़ाओं में तुम
तुम से जुदा नहीं हम
हम से खफा नहीं ग़म
गम को बना सर-ग़म
छेड़ेंगी उसकी ताल -
हम तुम।
थोड़े भीगे भीगे थे तुम,
थोड़े भीगे भीगे थे हम,
कुछ भीगा मौसम
और तुम मेरे पास थे।
आंखें थी नम,
भीनी-भीनी
बातें थी कम
आधी-आधी
सोया जहाँ था
पर तुम मेरे साथ थे।
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