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यादों की हठ


मैं खड़ा रहा
मार रहे तो वो लोग मेरेको,
कभी चप्पल से,
पत्थर से, कड़े से, बेल्ट से,

क्यों?

क्या कोई भी 'क्यों' ऐसे हिंसा को औचित्य साबित कर सकता है?

हाँ। अगर तुमने कोई ऐसा घिनौना काम किया हो। 

घिनौना क्या होता है साहब? वो जूते में टट्टी लगा के मुँह में भरने की बात कर रहा था। ये घिनौने नहीं हैं? अपनी बीवी का सोना बेचने आया था, सट्टे में लगाने के लिए.... 

अबे चुप कर, बहनचोद! कहानी सुनाने चला है 
बोलने का बोहोत शौक है ना तुझे ,
अब मैं बनाऊंगा तेरी कहानी।

और ऐसी, की फिर कभी कुछ बता नहीं पायेगा।

क्यों?

(फेड टू डार्कनेस)

तुम्हारा कोई सपना है?

हाँ। 

मैं पूरा कर सकता हूँ 

सपना सच नहीं हो सकता इसलिए वो सपना है। 

हो सकता है,
अगर चाहो तो। 

(A big stone falls from the sky)

ले , घडी तोड़।

सपना क्या है?

यादों की हठ।

(शाइन) Shine.
________________________

(कन्वर्सेशन इन डार्कनेस)

क्यों आये हो?

उधार चुकाने आया हूँ।

अच्छा।
३० दिसंबर की रात,
एक तारा गिरेगा
देखना ,
जो देखेगा वही बच पायेगा।

____________________

(Sound of a baby crying in a field while it is raining)

Man crawls through the mud to reach for a phone half dug in soil, glitching before short circuiting.

He takes the dead phone on his chest and cries.
(Crane shot)

______________________

A religuous man who has pictures of Dronacharya, in his house, listens to story of krishna, how an old peasant family found and looked after the child sent to them.

How transformatory, he imagined, would it have been, for the family, to whom god came. But what was god? he was struck at that for a while.


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चुप्पी

कभी कोई भी बात हो, कोई छोटी सी जस्बात हो, या कभी किसी से मुलाक़ात हो, तो मुझसे कहना। पल दो पल का साथ हो, कोई अनकही मुराद हो, जो भी दिल में बात हो, वो मुझसे कहना। अगर, कभी कोई ऐसी बात हो, जो मुझसे ना कह पाओ, उसे अपने दिल में मत दबाओ, या बिना कहे मत भूल जाओ। बताओ! क्यूंकि मैं सुन सकता हूँ सह सकता हूँ मान सकता हूँ अपना सकता हूँ जो भी सच हो, क्यूंकि मुझमे और तुम में कोई फर्क नहीं है। जो तुम्हारा सच है , वो ही मेरा भी है। सब कुछ बर्दाश्त हो सकता है पर तुम्हारी चुप्पी नहीं। 

क्या खोया, क्या पाया?

कुछ कहना चाहा, कुछ  कह न पाया। चुप रहना चाहा, चुप  रह न पाया। पास आने की कोशिश में, बस दुरी ही बढ़ा‌या। तो झिझक कर तुमने भी पूछ ही लिया  - 'अरे भई , क्या खोया, क्या पाया?' "क्या तुमने जान पाया - की कौन अपना, कौन पराया? क्या तुमने पहचान पाया - क्या है सपना, क्या यथार्थ की माया? तो क्या हुआ अगर व्यर्थ गई हर कोशिस मेरी? तो क्या हुआ अगर किस्मत ने दर्द की साजिश की थी? जो होना था सो तो हो गया, पर किसी भी गम में, तुम्हे तो भुला न पाया! तो क्या फर्क पड़ता है - की मैंने क्या खोया, क्या पाया? तुमने तो ढून्ढ लिया ना अपना हमसाया।"

The Red Pasta

White, Or red? Red, you said. I walked along. A saree, A smile A million hurled desires The calmness of the sea, Some titillating bourbon & And a few dozen joints. We cooked our pasta, In the heat of the moment.