किसने कहा, किस्से कहा और क्यों कहा?
मैं नहीं जानता। और ये भी नहीं जानता की कहूंगा नहीं तो रहूँगा कैसे?
कहना मेरा काम नहीं, पर और कुछ होता भी तो नहीं!
उधर से कोई बोलने लगा - "ये भी कहाँ होता है तुमसे?"
हाँ ठीक है। नहीं होता। पर इसमें कोशिस तो कर सकता हूँ,
किसी और मैं कोशिश करने की भी ज़ुर्रत नहीं कर सकता। पहले से ही इतने ग्यानी बहुत कुछ कर चुके हैं।
छोड़िये।
छोड़ दिया।
फोड़िये।
फोड़ दिया।
चूतिये।
तू चूतिया।
मैं नहीं जानता। और ये भी नहीं जानता की कहूंगा नहीं तो रहूँगा कैसे?
कहना मेरा काम नहीं, पर और कुछ होता भी तो नहीं!
उधर से कोई बोलने लगा - "ये भी कहाँ होता है तुमसे?"
हाँ ठीक है। नहीं होता। पर इसमें कोशिस तो कर सकता हूँ,
किसी और मैं कोशिश करने की भी ज़ुर्रत नहीं कर सकता। पहले से ही इतने ग्यानी बहुत कुछ कर चुके हैं।
छोड़िये।
छोड़ दिया।
फोड़िये।
फोड़ दिया।
चूतिये।
तू चूतिया।
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