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Showing posts from August, 2017

यादों की हठ

मैं खड़ा रहा मार रहे तो वो लोग मेरेको, कभी चप्पल से, पत्थर से, कड़े से, बेल्ट से, क्यों? क्या कोई भी 'क्यों' ऐसे हिंसा को औचित्य साबित कर सकता है? हाँ। अगर तुमने कोई ऐसा घिनौना काम किया हो।  घिनौना क्या होता है साहब? वो जूते में टट्टी लगा के मुँह में भरने की बात कर रहा था। ये घिनौने नहीं हैं? अपनी बीवी का सोना बेचने आया था, सट्टे में लगाने के लिए....  अबे चुप कर, बहनचोद! कहानी सुनाने चला है  बोलने का बोहोत शौक है ना तुझे , अब मैं बनाऊंगा तेरी कहानी। और ऐसी, की फिर कभी कुछ बता नहीं पायेगा। क्यों? (फेड टू डार्कनेस) तुम्हारा कोई सपना है? हाँ।  मैं पूरा कर सकता हूँ  सपना सच नहीं हो सकता इसलिए वो सपना है।  हो सकता है, अगर चाहो तो।  (A big stone falls from the sky) ले , घडी तोड़। सपना क्या है? यादों की हठ। (शाइन) Shine. ________________________ (कन्वर्सेशन इन डार्कनेस) क्यों आये हो? उधार चुकाने आया हूँ। अच्छा। ३० दिसंबर की रात, एक तारा गिरेगा देखना , जो दे...

लहराता तिरंगा

ये राष्ट्रीय ध्वज हमारा, इसे सत सत प्रणाम।  अगर ना करूँ तो कुछ गद्दार कहेंगे और कुछ कायर! पर कब से ऐसा होने लगा की हम उस ध्वजा को सर्वश्रेष्ठ आदर का चादर मानने लगे, भले ही हम में कितने दाग क्यों न लगे हों? क्या ये तब से हुआ जब उन स्वतंत्रता सेनानीयों ने अपनी बहादुरी से देश को आज़ाद कराया? तो क्या ये तब भी रहेगा जब किसी वजह से इस देश का विभाजन हो जाता है? जैसा पहले पाकिस्तान के साथ हो चूका है।  पहले हमारा राष्ट्रीय पताका ही उनका था, उसी पर उन्होंने अपने जान दिए थे और परिवार की कुर्बानी, फिर एक दिन उन्हें कह दिया गया की नहीं, अब ये (दूसरा) हमारा पताका है और हम इसके लिए लड़ेंगे।  क्या वो वीर भाग खड़े हुए, जो अब तक अपनी जान किसी और झंडे पे कुर्बान किये हुए थे? नहीं। उन्होंने अपनाया की ये हमारा नया झंडा है और आदेश का पालन किया जैसा वो हमेसा करते आये हैं।  साहस और बलिदान हर किसी की रूह में आग की तरह नहीं जलती होती, कई लोगों के रूह में होती है, जो सरहद पार लड़ते भी हैं। पर ये निर्णय उनका नहीं होता की वो किस से लड़ेंगे।  किसके...

चूतिया

किसने कहा, किस्से कहा और क्यों कहा? मैं नहीं जानता। और ये भी नहीं जानता की कहूंगा नहीं तो रहूँगा कैसे? कहना मेरा काम नहीं, पर और कुछ होता भी तो नहीं! उधर से कोई बोलने लगा - "ये भी कहाँ होता है तुमसे?" हाँ ठीक है।  नहीं होता।  पर इसमें कोशिस तो कर सकता हूँ, किसी और मैं कोशिश करने की भी ज़ुर्रत नहीं कर सकता। पहले से ही इतने ग्यानी बहुत कुछ कर चुके हैं। छोड़िये। छोड़ दिया। फोड़िये। फोड़ दिया। चूतिये। तू चूतिया।