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The failed poet

I am the failed poet

Still pretending to be one

How can one call itself a poet?

If they write poems -

- so is this a poetry?

Will you call me a poet?

Regardless, I pretend to be.

Because unlike you,

even I don't know.

Every shit that comes out of your mouth is not gold.

It's a lazy night.

No, I am.

And poetry is nothing but the yawning and stretching while sleeping.


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चुप्पी

कभी कोई भी बात हो, कोई छोटी सी जस्बात हो, या कभी किसी से मुलाक़ात हो, तो मुझसे कहना। पल दो पल का साथ हो, कोई अनकही मुराद हो, जो भी दिल में बात हो, वो मुझसे कहना। अगर, कभी कोई ऐसी बात हो, जो मुझसे ना कह पाओ, उसे अपने दिल में मत दबाओ, या बिना कहे मत भूल जाओ। बताओ! क्यूंकि मैं सुन सकता हूँ सह सकता हूँ मान सकता हूँ अपना सकता हूँ जो भी सच हो, क्यूंकि मुझमे और तुम में कोई फर्क नहीं है। जो तुम्हारा सच है , वो ही मेरा भी है। सब कुछ बर्दाश्त हो सकता है पर तुम्हारी चुप्पी नहीं। 

क्या खोया, क्या पाया?

कुछ कहना चाहा, कुछ  कह न पाया। चुप रहना चाहा, चुप  रह न पाया। पास आने की कोशिश में, बस दुरी ही बढ़ा‌या। तो झिझक कर तुमने भी पूछ ही लिया  - 'अरे भई , क्या खोया, क्या पाया?' "क्या तुमने जान पाया - की कौन अपना, कौन पराया? क्या तुमने पहचान पाया - क्या है सपना, क्या यथार्थ की माया? तो क्या हुआ अगर व्यर्थ गई हर कोशिस मेरी? तो क्या हुआ अगर किस्मत ने दर्द की साजिश की थी? जो होना था सो तो हो गया, पर किसी भी गम में, तुम्हे तो भुला न पाया! तो क्या फर्क पड़ता है - की मैंने क्या खोया, क्या पाया? तुमने तो ढून्ढ लिया ना अपना हमसाया।"

The Red Pasta

White, Or red? Red, you said. I walked along. A saree, A smile A million hurled desires The calmness of the sea, Some titillating bourbon & And a few dozen joints. We cooked our pasta, In the heat of the moment.