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Showing posts from July, 2019

एक आखरी सपना

तो क्या तू उसके पास जाएगा? नज़र नहीं फिरआएगा। मुझको भूल जाएगा तो क्या? तो क्या मैं दर पे गिर पडूँ? प्यार माँगूँ पर प्यार न करूँ? आज मैं विवेक हूँ कल कोई परलोक होगा। ज़िद्द है तो ज़िद्द है ये यहीं गिरूंगा , यहीं पडूंगा देवदास तो दीवाना था मैं तो अँधा दीन बनूँगा। है डर मुझे पर तू डर मत तुझे ख़ुशी के हाथों मैं सौंप के आऊंगा जिस दिन चाहत न मिले तुझको मैं मौत को गले लगाऊंगा। दीवाना कहेंगे, या पागल, बिशमिल कहेंगे या कायर - रास्ता कहेंगे या टायर - पटरी मैं जब बन पाउँगा तू जहाँ जाएगा, मैं ले जाऊंगा। कुछ किसी और का --- क़रीब आते हुए और दूर जाते हुए  ये कौन लोग हैं बे-वज्ह मुस्कुराते हुए । ये लम्हे साज़-ए-अज़ल से छलक के गिर गए थे  तभी से यूँ ही मुसलसल हैं गुनगुनाते हुए । एक ऐसी सम्त जिधर कब से हू का आलम है  मैं जा रहा हूँ अकेला क़दम बढ़ाते हुए । मैं कब से देख रहा हूँ अजीब सी हरकत  मेरा लिखा हुआ कुछ लोग हैं मिटाते हुए । जमाल ओवैसी

इस्तिहार

मैं पढ़ नहीं पा रहा हूँ कुछ नया गढ़ नहीं पा रहा हूँ तेरे ख्यालों में सिमटा जा रहा हूं। तेरे सवालों में उलझा जा रहा हूं। प्यार में डुुुबा जा रहा हुं? कैसा प्यार? जो कभी किसी से भी हो जाए? सो नहीं पा रहा हूँ रो नहीं पा रहा हूँ जब तू नहीं है तो ये हालत है तू होती तो क्या होता? कह के रुक जा रहा हूँ बिना कहे थक जा रहा हूँ जला जा रहा हूँ मरा जा रहा हूँ क्यों? क्या ये पहले नहीं हुआ? हुआ है ज़रूर। पर फिर से होना क्या गलत है ? क्या करूँ जो हो गया? क्या करूँ अगर दोबारा भी होगा , तुम तो भरोसा नहीं कर सकते ना इस बात का की मैं तुम्हारे साथ रहूँगा पर ये कोई वजह नहीं मेरे साथ न रहने क लिए। () वजहें मैं तुम्हे देता हूँ - मैं फूंकता हूँ माल यानि गांजा और सिगरेट तड़पता हूँ लड़ता हूँ , झगड़ता हूँ रूठता हूँ टूटता हूँ लड़खड़ाता हूँ घबराता हूँ दर जाता हूँ कभी लड़ नहीं पता हूँ शरमाता हूँ, शायद। तुमसे भी अब कह ही दिया जो कहना है इसे अपने ही दिल में रहने देना।

Where we are being watched

In an environment of fear, Where the head is kept low. Where knowledge is manufactured to serve a cause . Where the world exists in front of your eye, Connected by different screens. Where action is driven by the truth of being observed. Where effortless cautiousness embeds artificial pretentions. Where the clear sense of reason to rebel, Is lost in the relegious belief in control. Where the mind escapes in comforting memories, When we question within. In this clockwork of observation and control, my fellow subjects, let us dream of Freedom. Courtesy of: Sir Rabindra Nath Tagore (Where the mind is without fear)