तो क्या तू उसके पास जाएगा? नज़र नहीं फिरआएगा। मुझको भूल जाएगा तो क्या? तो क्या मैं दर पे गिर पडूँ? प्यार माँगूँ पर प्यार न करूँ? आज मैं विवेक हूँ कल कोई परलोक होगा। ज़िद्द है तो ज़िद्द है ये यहीं गिरूंगा , यहीं पडूंगा देवदास तो दीवाना था मैं तो अँधा दीन बनूँगा। है डर मुझे पर तू डर मत तुझे ख़ुशी के हाथों मैं सौंप के आऊंगा जिस दिन चाहत न मिले तुझको मैं मौत को गले लगाऊंगा। दीवाना कहेंगे, या पागल, बिशमिल कहेंगे या कायर - रास्ता कहेंगे या टायर - पटरी मैं जब बन पाउँगा तू जहाँ जाएगा, मैं ले जाऊंगा। कुछ किसी और का --- क़रीब आते हुए और दूर जाते हुए ये कौन लोग हैं बे-वज्ह मुस्कुराते हुए । ये लम्हे साज़-ए-अज़ल से छलक के गिर गए थे तभी से यूँ ही मुसलसल हैं गुनगुनाते हुए । एक ऐसी सम्त जिधर कब से हू का आलम है मैं जा रहा हूँ अकेला क़दम बढ़ाते हुए । मैं कब से देख रहा हूँ अजीब सी हरकत मेरा लिखा हुआ कुछ लोग हैं मिटाते हुए । जमाल ओवैसी
कुछ बिखरे बिखरे शब्द, कुछ रूखे सूखे दिनों के।