छूं ही लिया मन तेरा, छूं ही लिया हर सवेरा - की कितने महीनो से को शीश की थी तुझे पाने की की कितने नगीनो से पूछो जाकर कैसे मैंने रंजिश की, फरमाइश की थी तुझे अपना ब ना ने की छुं ही लिया मन तेरा।
कुछ बिखरे बिखरे शब्द, कुछ रूखे सूखे दिनों के।