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Showing posts from November, 2018

ये अफ़साने कोई गीत नहीं, बस आखरी नुमाइश हैं

सच लिखता हूँ - शायद वो भी लिखते हों। फ़र्क़ बस इतना है, की वो याद रखने के लिए लिखते हैं - और मैं भूलने के लिए। ये अफ़साने कोई गीत नहीं, बस आखरी नुमाइश हैं। 

मैं

 मैं हंस पडूँ तो वो पागल कहेंगे, मैं चुप रहूँ तो मतलबी। मैं रो पडूँ तो वो कायर कहेंगे, कुछ कह चलूँ तो बनावटी।