कल तक जो खामोश था, आज कैसे लिख पड़ा ? इस दिल से पूछो क्या हुआ, क्यों मिल के भी ना मिल सका ! पहली दफा, देखा नहीं था तुम्हे, बस महसूस किया था , जैसे नदियों की सतह पर बहती हुई हवा। कुछ अनकही, कुछ अनसुनी, बातें हुई ज़रूर, पर ये दिल न जाने क्यों, तुझे भूल न पाने लगा। दूसरी दफा, कुछ बेतुकी सी बातों में, मन खो सा गया था , तू नहीं थी सामने, और दिल रो सा गया था। सोचा सब कुछ भूल जाऊं, और कोई न जस्बात दिखाऊं। वो पल तो गुज़र गए, पर दूर से आती हुई, तेरी मुस्कुराहटों की आवाज़, आज भी मेरे दिल की गहराईयों में गूंजती है। तीसरी दफा, शायद तुमने मुझे देखा, या न भी देखा हो , उस पल में मैं खुश था। शायद हर अरमान दिल के सच नहीं हो सकते , पर तुमने जो पल दिए मुझे , मेरे साथ चलकर या बात कर कर। शायद उस से ज़्यादा मैं कभी तुमसे नहीं मांग सकता। तू होती तो क्या, क्या होता ! Watch a song
कुछ बिखरे बिखरे शब्द, कुछ रूखे सूखे दिनों के।