- बात बस इतनी सी है, तुम कहना चाहते हो, मैं सुन ना नहीं , तुम बताना चाहते हो, मैं जान ना नहीं , तुम मनाना चाहते हो, मैं मानना नहीं , जाने अनजाने, कोई ऐसा कह दे कभी - तो खौल मत उठना , क्योंकि तुमने भी कभी माना था , उसी को सत्य जाना था , जो किसी और ने सुनाया था ।
कुछ बिखरे बिखरे शब्द, कुछ रूखे सूखे दिनों के।