प्रमाण क्या दूँ ? सच्चाई का , इन शब्दों की गहराई का , छूटते उन भावों का, टूटते अभिमानों का, कुछ ऎसे स्वाद करारों का, उनके रेशम से गालों का, चुबते जस्बातों का, सतरंगी मिजाजों का, अनहोनी के होने का, गुमसुम हो रोने का, प्रमाण क्या दूँ? इन बातों की गहराई का, और अपनी सच्चाई का?
कुछ बिखरे बिखरे शब्द, कुछ रूखे सूखे दिनों के।